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अबान की मौत…अली से मिलने नहीं आया कोई परिजन:झांसी जेल में बंद अतीक के बेटे ने नए मुलाकाती के नाम नहीं दिए, सिर्फ वकीलों से ही मुलाकात कीझांसी6 मिनट पहले
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झांसी में अतीक अहमद के बेटे अबान की मौत के बाद बड़ा भाई अली अहमद झांसी जेल में अकेला पड़ गया है। अबान की मौत के बाद एक महीने में उससे मुलाकात करने कोई भी परिजन झांसी जेल नहीं पहुंचा।
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पहले अबान ही उससे मिलने 7 से 8 दिन में झांसी जेल आता था। अब एक महीने से अली सिर्फ वकीलों से ही मुलाकात कर रहा है। अली ने भी अभी तक किसी परिजन या रिश्तेदार का नाम मुलाकाती के तौर पर दर्ज नहीं कराया है।
वह करीब 11 महीनों से झांसी जेल में बंद है। 6 अगस्त को अबान उससे नियमित मुलाकात के लिए झांसी जेल आ रहा था। झांसी-कानपुर हाईवे पर पूंछ के खिल्ली गांव के पास अबान की तेज रफ्तार कार रिटेनिंग वाल से जा टकराई थी। इसमें अबान और उसके दोस्त की मौत हो गई थी।
अली अहमद एक अक्टूबर 2025 से झांसी जेल में बंद है।
दूसरा भाई लखनऊ जेल में बंद
अतीक अहमद का बड़ा बेटा उमर लखनऊ जेल में बंद है, जबकि अली 1 अक्टूबर 2025 से झांसी जेल में है। अली से मिलने के लिए अबान झांसी आता था। उमर से मिलने के लिए उनका मंझला भाई अहजम जाता था।
अबान तकरीबन हर सप्ताह ही अली से मिलने झांसी आता था। वह अब तक 40 से अधिक बार जेल में उससे मुलाकात कर चुका था। अली अपनी पसंद की चीजें भी अक्सर अबान से ही मंगवाता था। हादसे में अबान की मौत से अली को काफी झटका लगा।
प्रयागराज में अबान के अंतिम संस्कार में शामिल होने के दौरान उसने भाई अहजम को भी झांसी जेल में आकर मुलाकात से रोका था। इसके बाद पिछले करीब एक माह से अली से मिलने उसका कोई रिश्तेदार जेल नहीं पहुंचा। उसके वकील ही मिलने आए। भाई की मौत के बाद से अली अपनी बैरक में अकेला रहता है।
तस्वीर 17 सितंबर 2025 की है, अबान अपने बड़े भाई अली से मिलने नैनी सेंट्रल जेल पहुंचा था। फिर 1 अक्टूबर को अली को नैनी से झांसी जेल में शिफ्ट कर दिया गया था।
झांसी जेल में अबान लगभग हर हफ्ते मिलने आता था
अली अपने छोटे भाई अबान को जी-जान से चाहता था। अबान भी उसे प्यार करता था। हर महीने करीब तीन-चार बार वह मिलता था। मुलाकात के दौरान LIU और सिपाही भी मौजूद रहते थे।
सूत्र बताते हैं कि जैसे ही अली और अबान एक-दूसरे को देखते थे तो गले लग जाते थे। कुछ मिनटों तक वे ऐसे ही मिलते थे। सख्त पहरे में दोनों की मुलाकात होती थी। मुलाकात के सिलसिले में अबान कई बार बस स्टैंड के पास एक होटल में रुकता भी था।
हर मुलाकात पर अबान अपने बड़े भाई के लिए नॉवेल और किताबें पढ़ने के लिए लाता था। हादसे के बाद कार से दो किताब- ‘द स्टेशनरी शॉप ऑफ तेहरान’ और ‘द इडियट’ मिली थीं।
हादसे के बाद कार की तलाशी ली गई तो उसमें दो नई किताबें भी मिली थीं।
नए मुलाकाती का नाम नहीं मिला
वरिष्ठ जेल अधीक्षक विनोद कुमार ने बताया कि अली ने अब तक किसी रिश्तेदार का नाम मुलाकाती के तौर पर जेल प्रशासन को नहीं दिया है। मुलाकात के लिए अली से मिलने आने वालों का जेल प्रशासन बाकायदा रिकॉर्ड रखता है। एलआईयू को भी सूचना दी जाती है। अबान की मौत के बाद अली वकीलों से ही मुलाकात कर रहा है।
अबान भाई से जेल मिलने जा रहा था, सड़क हादसे में हुई मौत
अबान 6 अगस्त, गुरुवार सुबह 5 बजे प्रयागराज से झांसी जेल में बंद बड़े भाई अली से मिलने जा रहा था। क्रेटा कार में अबान के साथ उसके 4 दोस्त थे। झांसी से 70 किमी पहले सुबह 10.30 बजे पूंछ थाना इलाके में तेज रफ्तार कार डिवाइडर से टकरा गई। एअरबैग खुले, लेकिन टक्कर इतनी भीषण थी कि कार 7 फीट हवा में उछल गई। 40 फीट तक कार के टुकड़े हाईवे पर बिखर गए। कार का बायां हिस्सा चकनाचूर हो गया।
पुलिस और राहगीरों ने जैसे-तैसे दरवाजा तोड़कर सभी को बाहर निकाला। आगे की सीट पर बैठे अबान और उसके पीछे बैठे दोस्त सोनू की मौके पर मौत हो गई। जबकि बाकी 3 घायल उमर अहमद, मोहम्मद जैद और फारुक अहजम को मेडिकल कॉलेज भिजवाया गया। प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक, मरने से पहले अबान के आखिरी शब्द थे- मुझे बचा लो…।
अबान-सोनू के शव शुक्रवार तड़के 4 बजे एक ही एंबुलेंस से झांसी से प्रयागराज के हटवा गांव लाए गए। यहां अबान की बुआ का घर है। अतीक का घर टूटने के बाद अबान वहीं रहता था।
अबान का शव लेने झांसी पहुंचे अहजम ने कहा था- “अल्लाह की चीज थी, अल्लाह ने ले ली।” 2023 में असद के एनकाउंटर के बाद अतीक के भाई अशरफ ने भी यही बात कही थी। भाई की मौत की खबर मिलने के बाद जेल में बंद अली रातभर सोया नहीं। वह रोता रहा और खाना भी नहीं खाया।
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