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आफताब बोले- शूटिंग से ज्यादा खाने का इंतजार रहता था:डायरेक्टर ने कहा- ऐसा लग रहा था जैसे हम फिल्म नहीं, यादें बना रहे हों1 घंटे पहलेलेखक: आशीष तिवारी
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अहमद खान और आफताब शिवदासानी ने ‘वेलकम टू द जंगल’ की शूटिंग से जुड़े अनुभव साझा किए।
‘वेलकम टू द जंगल’ की चर्चा अब तक इसकी बड़ी स्टारकास्ट और स्केल को लेकर होती रही है, लेकिन फिल्म से जुड़े लोगों के लिए इसकी सबसे खास बात कुछ और थी।
डायरेक्टर अहमद खान और अभिनेता आफताब शिवदासानी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि लंबे शूटिंग शेड्यूल के दौरान फिल्म का सेट सिर्फ काम की जगह नहीं रहा, बल्कि ऐसा स्पेस बन गया जहां कलाकारों ने साथ समय बिताया, पुरानी केमिस्ट्री दोबारा जी और कई नई यादें बनाई।
दोनों ने बताया कि कई बार शूट खत्म होने के बाद भी लोग सेट पर रुके रहते थे, क्योंकि वहां का माहौल किसी फिल्म से ज्यादा एक बड़े गैदरिंग जैसा लगने लगा था।
अहमद खान ने कहा कि इतनी बड़ी टीम को संभालना चुनौती नहीं, बल्कि साथ की एनर्जी को यादगार बनाना था।
सवाल: इस फिल्म के सेट को बाकी फिल्मों से अलग क्या बनाता था?
जवाब/अहमद खान:आमतौर पर लोग फिल्म पर आते हैं, अपना काम करते हैं और चले जाते हैं। यहां वैसा नहीं था। यहां लोगों को सेट पर रहने में मजा आ रहा था। कई बार जिन कलाकारों का शूट नहीं होता था, वो भी मौजूद रहते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि कहीं कुछ मजेदार मिस न हो जाए। धीरे-धीरे ऐसा माहौल बन गया जहां काम के साथ दोस्ती और अपनापन भी जुड़ गया।
सवाल: इतने सारे कलाकारों के बीच माहौल कैसे बना रहा?
जवाब/अहमद खान:जब इतने लोग साथ काम करते हैं तो हर किसी की अपनी एनर्जी होती है। कोई बहुत तैयारी करके आता है, कोई मौके पर चीजें बदल देता है। मुझे लगा कि अगर सबको थोड़ा खुलने दिया जाए तो बेहतर चीजें निकलकर आएंगी। मेरा काम सिर्फ उस एनर्जी को सही दिशा देना था।
सवाल: क्या कभी लगा कि लोग शूट से ज्यादा एक-दूसरे के लिए आ रहे हैं?
जवाब/अहमद खान:हां, कई बार। लेकिन मुझे लगता है वही इस फिल्म की सबसे अच्छी बात थी। लोग काम करके जा नहीं रहे थे, वो वक्त भी साथ बिता रहे थे। कई लोगों ने कहा कि उन्हें ऐसा लग रहा था जैसे कॉलेज वाले दिन वापस आ गए हों।
सवाल: कॉमेडी में इम्प्रोवाइजेशन कितना काम आया?
जवाब/अहमद खान:बहुत ज्यादा। कई बार सीन स्क्रिप्ट से शुरू होता था लेकिन कलाकारों की वजह से उसका रूप बदल जाता था। कॉमेडी में यही मजा होता है कि आप थोड़ा स्पेस दो तो कई अच्छी चीजें सामने आती हैं।
आफताब शिवदासानी ने कहा कि शूटिंग अपनी जगह थी, लेकिन सबके साथ बिताया वक्त सबसे यादगार रहा।
सवाल: आफताब, इतने साल बाद इस टीम के साथ लौटना कैसा रहा?
जवाब/आफताब शिवदासानी:बहुत सहज लगा। ऐसा नहीं लगा कि इतने साल निकल गए हैं। कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जहां दोबारा शुरुआत नहीं करनी पड़ती। बस वहीं से बात शुरू हो जाती है जहां छोड़ी थी।
सवाल: शूटिंग के दौरान सबसे यादगार चीज क्या रही?
जवाब/आफताब शिवदासानी:मैं मजाक में कहता था कि मुझे शूट से ज्यादा लंच का इंतजार रहता था। लेकिन उसमें सच्चाई भी थी। लंच टाइम वो वक्त होता था जब सब लोग साथ बैठते थे, बातें करते थे, हंसते थे। कई यादें वहीं बनीं।
सवाल: अगर इस पूरे सफर को एक लाइन में बताना हो तो क्या कहेंगे?
जवाब/अहमद खान:कई बार ऐसा लगता था कि हम फिल्म नहीं बना रहे, यादें बना रहे हैं। इतने लंबे समय तक साथ रहने के बाद सबके बीच एक अलग जुड़ाव बन गया था।
सवाल: इस फिल्म की सबसे बड़ी याद क्या रहेगी?
जवाब/आफताब शिवदासानी:मेरे लिए यही कि इतने साल बाद भी लोगों के बीच वही अपनापन बना रहा। फिल्में खत्म हो जाती हैं, लेकिन कुछ लोग और कुछ पल साथ रह जाते हैं। यही चीज सबसे ज्यादा याद आएगी।
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